Saturday, 1 January 2011



...........कि तुम्हारी आंखों में एक सपना है।
‘महाराजा गंगासिंह विष्वविद्यालय के 1.80 लाख विद्यार्थियों ने इस शैक्षणिक सत्र की परीक्षाओं के लिए ऑनलाईन आवेदन किया है। राज्य में विष्वविद्यालय स्तर पर यह अनूठा प्रयास है। यह प्रयास और खास बन जाता है, जब विष्वविद्यालय के सीमित संसाधनों के बावजूद इस उपलब्धि को छूआ जाता है। शैषवावस्था के दौर से गुजर रहे विष्वविद्यालय के मुट्ठीभर हाथों की कर्मण्यता ही, इस सोच को मूर्त रूप देने में महत्ती भूमिका निभा पाई है।’
बीकानेर स्थित विष्वविद्यालय के कुलपति डॉ गंगाराम जाखड़ द्वारा गत दिनों एक समारोह में कही यह बात मेरे लिए कुछ नयापन लिए थी। मेरे दिमाग में विष्वविद्यालय की वही छवि बसी थी, जहां लाखों की तादाद में आवेदन-पत्र, स्टोर में ढेर बने पड़े रहते और दर्जनों कर्मचारी, इनकी जांच के लिए कईं दिन मषक्कत करते। बाद में दस्तावेजों की कमी अथवा गड़बड़ियां पाई जाती और संबंधित महाविद्यालय को या विद्यार्थी से सही रिकॉर्ड तलब करना पड़ता था। इससे समय और श्रम की अत्यधिक बर्बादी तो होती, साथ ही आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह महंगा पड़ता था।
डॉ जाखड़ ने आगे कहा कि जब ऑनलाईन प्रक्रिया के बारे में सोचा गया और सहयोगियों से चर्चा हुई तो उन्होंने इसे बहुत मुष्किल बताया और इसे लागू न करने की सलाह दी। उनका मानना था कि विष्वविद्यालय की स्थिति को देखते हुए यह संभव नहीं हो पाएगा और हो सकता है, हम सफल न हों। ‘प्रयास ही नहीं करेंगे, तो सफल कैसे होंगे’, यह जवाब सुनने के बाद, मौन स्वीकृति देना सबकी मजबूरी थी। फिर क्या था, ऑनलाईन आवेदन की व्यूह रचना तैयार हुई और संयुक्त जिम्मेदारी के आधार पर बढ़ते हुए, विष्वविद्यालय ने सफलता प्राप्त करके ही दम भरा। गत माह के अंत तक 1.80 लाख विद्यार्थी ऑनलाईन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं और अब महज, एक क्लिक के साथ ही, किसी भी विद्यार्थी का रिकॉर्ड प्राप्त किया जा सकता है। विष्वविद्यालय ने बता दिया कि दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ किए गए प्रयास रंग लाते हैं। यहां अल्बर्ट गिलबर्ट का कथन सार्थक होता है कि जब हम कठिन कार्य को चुनौती के रूप मे स्वीकार करते हैं तथा उसे खुषी और उत्साह से निष्पादित करते है तो चमत्कार हो जाते हैं। पाब्लो पिकासो ने भी कहा है कि मैं हमेशा उस काम को करने की कोशिश करता हॅंू जिसे मैं कर नहीं सकता, फिर मैं यह सीखता हूं कि उसे कैसे किया जाए?
इस पूरी प्रक्रिया में एक और चमत्कार हुआ। स्कूली शिक्षा खत्म कर महाविद्यालय का रूख करने वाले ग्रामीण परिवेश के अनेक छात्रों ने न सिर्फ कम्प्यूटर एवं इंटरनेट की प्रक्रिया को समझा और जाना बल्कि बैंक के माध्यम से राशि जमा करवाने से उन्हें, इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी भी हासिल हो पाई।ं कॅरियर निर्माण के लिए इन्हें, इस दौर से कईं बार गुजरना है। ऐसे में ऑनलाईन आवेदन और बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी होने से उन्हें, दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। इस तरह उन्हें दुर्लभ अवसर, बड़ी आसानी से प्राप्त हो गए।
इसके संदर्भ में एक बार फिर यही बात सटीक बैठती है कि ‘जहां चाह है, वहीं राह है’। सोच के बिना यह सब संभव नहीं हो पाता और ऐसा न होेने पर, अब भी लम्बी-लम्बी कतारें दिखती। उन कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते युवाओं का समय और उर्जा तो व्यर्थ जाती हीं, विष्वविद्यालय के टेबल-वर्क में भयंकर इजाफा हो जाता। पूरे घटनाक्रम में एक छोटी सी सोच ने, जो नई दिषा दिखाई है, उसे इन शब्दों में कहा जा सकता है-
कुछ भी न हो, सिर्फ हो एक सपना, तो भी हो सकती है, एक शुरूआत।
और ये एक शुरूआत ही तो है, कि तुम्हारी आंखों में एक सपना है।


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